अक्सर यह दिन मुझे याद आएगी 28 june बहुत याद आएगी आज का ही दिन था जब मेरे घर से मेरी विदाई हो गई. घर ने विदा किया घरवालों ने नहीं, उसका अभी वक्त नहीं आया था ऐसे कैसे विदा कर देते... माता पिता ने पड़ोसियों की नहीं सुनी यह नहीं सोचा की "लोग क्या कहेंगे" बस मेरा और अपना सपना पूरा करने के लिए भेज दिया मुझे... आखरी पड़ाव तो अभ बाकी था मैंने entrance कहाँ दिया था, कहाँ मैने यूनिवर्सिटी में एडमिशन कराया था अपना. पर ट्रेन में चढ़ने के बाद मेरे हाथ में एक पेपर का बंडल थमाया और कहा की जब छुट्टी का पता चल जाए तब इसे घर भेज देना भरोसा तो देखो अब तक डेस्टिनेशन के लिए रवाना भी नही हुई थी पर सपने पूर से हो गए थे अभी गई भी नहीं और यहाँ वापिस घर कैसे आना हे इसकी चिंता शुरू हो गई थी. पापा थे भला कैसे अपनी एक लौती बेटी को छोड़ देते . आँखें भर आई थी पर कमज़ोर नहीं पड़ना था वरना सामने खड़ी बेटी रो देती . माँ साथ में आ रही थी मेरे, उनको तो फिर भी वक्त था मेरे साथ गुजारने को. मैं अपनी सहेली के साथ ट्रेन से उतर कर फोटो निकाल रही थी तभी पापा ट्रेन से मम्मा से मिलकर आकर बोलते हैं चल टाइम हो गया अब ट्रेन में चढ़ जा शायद यह बोलते-बोलते उनकी आवाज़ भर आई . इशारे से आगे कहा, फिर कहा पता है तु ऐट्रेंस क्लीयर नहीं कर पाएगी फिर भी अपनी पूरी ज़ोर लगा देना पिछे मत हटना कोई सवाल मत छोड़ना और इतना बोलते ही ट्रेन की हॉर्न बज उठी एक बार नहीं कई बार बजी पर ट्रेन छुटने का नाम नहीं ले रही थी ना जाने कितने सपने पूरे होने वाले थे पर साथ ही कुछ रिश्तों पर असर पड़ने वाला था साथ ही कुछ रिश्ते और मजबूत होने वाले थे कुछ और भी ज्यादा एक दूसरे को याद करने वाले थे. आँखों में भर रहे आँसू को ट्रेन मुझे दिखाना नहीं चाहती थी और इसलिए झटके से ट्रेन चालनी शुरू हो गई. झटका ज़ोर का था इसलिए मैं अदंर आगई डर के मारे कि कहीं पापा के सामने न रो दूं. पापा टूट जाएंगे फिर दो पल में ही वापिस दरवाज़े पर ही बाए बोलने के लिए आगई वह भी बिना रोए. मैंने कहा बाए और चल पडी अपने आखरी पडाव की ओर..
To express the feelings and emotions that remained untold due to situations. Giving words to those emotions.
Thursday, June 28, 2018
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चींटी और इंसान
एक दिन एक चींटी को निचे गिरा हुआ पत्ता मिला। पत्ता किस काम में आएगा उसे नहीं पता था। यह पता लगाने क लिए भी उसके पास बोधशक्ति का अभाव था। ...
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एक दिन एक चींटी को निचे गिरा हुआ पत्ता मिला। पत्ता किस काम में आएगा उसे नहीं पता था। यह पता लगाने क लिए भी उसके पास बोधशक्ति का अभाव था। ...
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If I ever knew that was the first and last time I was kissed back, I would never have allowed you to kiss me. If I ever knew that...
Beautiful 👌
ReplyDeleteProud of uh jaggu. Outstanding�� And now its ur turn to prove ppl wrong dear.. all d best babes�� n yaad rakh i am always with you..
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteअति उत्तम 👌👌
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